सोनम वांगचुक कल खत्म कर सकते हैं भूख हड़ताल, पत्नी गीतांजलि ने रखी बड़ी शर्त


नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल रविवार को एक अहम मोड़ पर पहुंच गई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने समर्थकों को संबोधित करते हुए बताया कि यदि राजनीतिक दल संसद के मानसून सत्र में शिक्षा से जुड़े जवाबदेही के मुद्दे को उठाने का स्पष्ट भरोसा देते हैं, तो सोनम वांगचुक 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।

गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित नेताओं को स्वयं अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात करनी होगी और आंदोलन के उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करनी होगी। तभी अनशन समाप्त करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

आंदोलन जारी रहेगा, सिर्फ रणनीति बदलेगी

डॉ. गीतांजलि ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त करने का अर्थ आंदोलन खत्म करना नहीं है। उनका कहना है कि यह केवल आंदोलन को लोकतांत्रिक और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों को उठाने का अभियान पहले की तरह जारी रहेगा।

' संसद चलो मार्च' को शांतिपूर्ण रखने की अपील

20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद चलो मार्च' से पहले सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों के नाम विशेष संदेश भेजा है। संदेश में उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि पूरा मार्च शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आयोजित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी असामाजिक तत्व को आंदोलन का गलत फायदा उठाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

संसद सत्र से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा

सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र को देखते हुए राजधानी दिल्ली, विशेष रूप से नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं डॉ. गीतांजलि आंग्मो

इस बीच, डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की है।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी गई थी। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की मांग की गई है।

सोनम वांगचुक का आंदोलन फिलहाल निर्णायक मोड़ पर है। अब सबकी निगाहें राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और संसद के मानसून सत्र पर टिकी हैं। यदि नेताओं की ओर से ठोस आश्वासन मिलता है, तो उनका अनशन समाप्त हो सकता है, लेकिन शिक्षा और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर उनका अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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