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लखनऊ: कूड़े के पहाड़ अब बन रहे 'सोने की खदान'! IIT की मदद से चमकेगा शहर

क्या आप सोच सकते हैं कि एक शहर, जो कभी 17.5 लाख मीट्रिक टन कूड़े के ढेर तले दबा था, आज उसी कचरे को 'संसाधन' में बदल रहा है? जी हां, लखनऊ नगर निगम ने यह कमाल कर दिखाया है! सिर्फ 16 महीनों में, शहर ने अपने दशकों पुराने, कचरे के विशालकाय पहाड़ों को लगभग साफ कर दिया है। अब यह कूड़ा शहर के लिए बोझ नहीं, बल्कि आय का स्रोत और प्रगति का प्रतीक बन रहा है।

अकल्पनीय गति: 10 साल का कचरा, 16 महीने में साफ!

नगर निगम के दावों पर यकीन करें तो, लगभग 20 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से अब सिर्फ ढाई लाख मीट्रिक टन ही बचा है। यह किसी जादू से कम नहीं! रोजाना 5000 मीट्रिक टन (नए और पुराने) कचरे का निस्तारण करके, लखनऊ ने देश के सामने एक मिसाल पेश की है। कल्पना कीजिए, शहर से हर दिन निकलने वाले 2000 टन नए कचरे के साथ, लगभग 3000 मीट्रिक टन पुराने कचरे का भी निपटान हो रहा है। इस रफ्तार से, वो कूड़े के पहाड़ जो कभी शहर की पहचान थे, अब इतिहास के पन्नों में सिमटते जा रहे हैं।


सुदूर भविष्य में लखनऊ शहर की कल्पना को दर्शाती एक छवि जिसमें कचरे के ढेर गायब हो गए हैं और शहर एक स्वच्छ, हरा-भरा और आधुनिक महानगर में बदल गया है, जिसमें एक शानदार क्षितिज और उन्नत प्रौद्योगिकी है, जो कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण में अग्रणी है, साथ ही नागरिकों के लिए जीवंत और समृद्ध जीवन भी है।

नई चुनौती: 15 लाख मीट्रिक टन कचरे के लिए IIT-MNIT से मांगी मदद

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती! एक बड़ी चुनौती अभी भी बाकी है। अक्टूबर 2022 से जुलाई 2025 के बीच का लगभग 12 से 15 लाख मीट्रिक टन कचरा शिवरी क्षेत्र में अलग से डंप किया गया था। यह कचरा तकनीकी रूप से जटिल माना जा रहा है। इसी जटिल कचरे के निस्तारण के लिए लखनऊ नगर निगम ने देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों – IIT दिल्ली और MNIT प्रयागराज से हाथ मिलाया है।

ये एजेंसियां इस कचरे की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और निस्तारण की सबसे प्रभावी तकनीक का आकलन करेंगी। वे यह तय करेंगी कि इसे किस तकनीक से, कितने समय में और कितनी लागत पर निपटाया जा सकता है। एक बार सही आंकलन हो जाने के बाद, नगर निगम टेंडर जारी करेगा और इस विशाल ढेर को भी इतिहास बना देगा।

पुणे की भूमि ग्रीन एनर्जी: कचरा निस्तारण की मास्टरमाइंड

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पीछे पुणे की भूमि ग्रीन एनर्जी कंपनी का हाथ है। यह एजेंसी नगर निगम के साथ मिलकर लखनऊ में कचरा निस्तारण का काम कर रही है। देश के कई बड़े शहरों में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे चुकी यह कंपनी, आधुनिक तकनीक और मशीनों का उपयोग करके कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदल रही है।

कचरा बना 'सोना': RDF से राजस्व, मिट्टी से हरियाली!

लखनऊ के प्लांट में निस्तारित हो रहे कचरे से बड़े पैमाने पर RDF (Refuse Derived Fuel) तैयार किया जा रहा है। यह ईंधन उद्योगों में आग जलाने के काम आता है और कई बड़ी कंपनियां इसे खरीद रही हैं। इससे नगर निगम को न सिर्फ राजस्व मिल रहा है, बल्कि कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग भी हो रहा है।

इतना ही नहीं, कचरे का एक हिस्सा प्रोसेस होकर उपजाऊ मिट्टी में बदल रहा है! इस मिट्टी का उपयोग लैंडस्केपिंग और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है। हाल ही में, ओमेक्स कंपनी ने 50 लाख रुपये की इस "कचरा-जनित" मिट्टी का ऑर्डर देकर इसकी उपयोगिता साबित कर दी है।

निर्माण कचरे से कलाकृतियाँ: टाइल्स और गमले

शहर से निकलने वाले कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट को भी एक अलग प्लांट में भेजा जा रहा है। यहां इस मलबे से खूबसूरत टाइल्स, टिकाऊ गमले और अन्य उपयोगी सामान तैयार किए जा रहे हैं। यह सिर्फ कचरा निस्तारण नहीं, बल्कि "कचरे से कंचन" बनाने का अद्भुत उदाहरण है!


एक कचरा प्रसंस्करण संयंत्र जिसमें एक छोर पर कचरे के विशाल ढेर और दूसरे छोर पर तैयार उत्पाद, जैसे आरडीएफ बैग, टाइल्स और गमले दिखाई दे रहे हैं। संयंत्र का एक हिस्सा एक डिजिटल बोर्ड प्रदर्शित करता है जो लखनऊ के कचरा प्रबंधन के लिए आईआईटी-एमएनआईटी से मांगी गई मदद के साथ 15 लाख मीट्रिक टन कचरे के लक्ष्य को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके हैं तारीफ!

यह जानकर आपको और भी गर्व होगा कि जिस घैला स्थान पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण हुआ है, वहां भी कभी 6 लाख मीट्रिक टन कचरे का पहाड़ खड़ा था। नगर निगम ने इसका निस्तारण करवाया और उस जगह को एक सुंदर प्रेरणा स्थल में बदल दिया। 25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण करते हुए इस काम की सराहना की थी।

जैसा कि अपर नगर आयुक्त, डॉ. अरविंद कुमार राव बताते हैं, "नगर निगम के शिवरी प्लांट में बहुत तेजी से कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। लगभग 3000 मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण रोज किया जा रहा है। शहर से रोज निकलने वाला नया 2000 टन कचरा भी निस्तारित हो रहा है। 2022 से 25 के बीच के कचरे के लिए IIT दिल्ली से मदद मांगी गई है।"

लखनऊ का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे दृढ़ संकल्प, आधुनिक तकनीक और सही साझेदारी से किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। लखनऊ सचमुच कचरे के पहाड़ों को 'सोने की खदान' में बदल रहा है!

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