पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर बवाल: 'गजनी, लोदी हिंदुस्तानी लुटेरे थे' - बीजेपी का तीखा पलटवार


नई दिल्ली: देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने मध्यकालीन शासकों महमूद गजनवी और लोदी वंश को "हिंदुस्तानी लुटेरे" करार देते हुए एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

अंसारी ने अपने बयान में कहा, "अपनी किताबों में लोग छपवाते हैं कि कोई लोदी है तो कोई गजनी है… ये सब हिंदुस्तानी लुटेरे थे। ये बाहर से नहीं आए थे।" उन्होंने आगे कहा कि "राजनीतिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोग कहते हैं कि उन्होंने ये तोड़ दिया और वो तोड़ दिया। सब हिंदुस्तानी थे।"

यह बयान आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। भाजपा ने इसे तुरंत लपेटते हुए कांग्रेस और तथाकथित 'कांग्रेस इकोसिस्टम' पर करारा हमला बोला।


भाजपा का पलटवार: 'इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास'

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने हामिद अंसारी के बयान को "अलग-थलग घटना" मानने से इनकार करते हुए इसे एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया, जिसमें "कांग्रेस से जुड़े लोग बार-बार भारत के मध्यकालीन इतिहास को साफ-सुथरा दिखाने का प्रयास करते हैं।" पूनावाला ने आरोप लगाया कि अंसारी, शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे लोगों को 'युवा नेता' बताने के बाद अब महमूद गजनवी जैसे शासक का महिमामंडन कर रहे हैं, जिसने सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था।

पूनावाला ने कहा, "कांग्रेस इकोसिस्टम गजनवी का गुणगान करता है, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विरोध करता है और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों को सफेदपोश बनाता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार मध्यकालीन इतिहास की अपने अनुसार फिर से व्याख्या कर समकालीन राजनीतिक एजेंडे के तहत कर रही है।

हामिद अंसारी के बयान का मूल: 'गजनी-लोदी विदेशी नहीं'

अंसारी की टिप्पणी हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान आई थी, जहां उन्होंने कहा था, "लोदी और गजनवी भारतीय लुटेरे थे, वे बाहर से नहीं आए थे। उन्हें विदेशी कहना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन वे विदेशी नहीं थे।" यह बयान मध्यकालीन भारत के इतिहास और उसके शासकों की पहचान को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

क्या कहता है इतिहास?

महमूद गजनवी: इतिहासकारों के अनुसार, महमूद गजनवी गजनवी साम्राज्य का शासक था, जिसका केंद्र वर्तमान अफगानिस्तान में था। उसने 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच भारतीय उपमहाद्वीप में कई सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया, जिन्हें व्यापक रूप से लूट और विस्तार के उद्देश्य से किए गए आक्रमण माना जाता है। समकालीन स्रोतों में कई मंदिरों के विध्वंस का उल्लेख मिलता है, जिनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर प्रमुख है। गजनवी ने भारत में स्थायी शासन स्थापित नहीं किया और उसका राजनीतिक आधार उपमहाद्वीप के बाहर ही रहा।

लोदी वंश: लोदी वंश 1451 से 1526 तक दिल्ली सल्तनत का अंतिम शासक रहा। इसकी स्थापना बहलोल लोदी ने की थी और इसके शासक अफगान मूल के माने जाते हैं। हालांकि, लोदी शासकों ने लंबे समय तक उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया और प्रशासनिक ढांचे में गहराई से शामिल हुए, लेकिन इतिहासकार आमतौर पर उन्हें विदेशी मूल के शासक मानते हैं जिन्होंने विजय के जरिए सत्ता स्थापित की।

हामिद अंसारी का यह बयान इतिहास की व्याख्या और राष्ट्रीय पहचान को लेकर जारी बहस में एक नया मोड़ ला सकता है।



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